इंसानियत दिखाने वाले का उत्साहवर्धन जरूरी है वरना लोग इंसानियत का अर्थ भूल जायेंगे
गुजरात में कच्छ के एक व्यवसाई ने न सिर्फ याददाश्त खो चुके कर्मचारी को उसके परिवार से मिलवाया बल्कि ईमानदारी का परिचय देते हुए कर्मचारी द्वारा उसकी कम्पनी में की गई नौकरी की बचत की रकम भी परिवार को लोटा कर इंसानियत की मिसाल पेश की |
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हुआ यूँ की कच्छ गुजरात के कारोबारी भरत भाई गोरसिया ने संतोष उड़के नामक व्यक्ति को अपनी कम्पनी में नौकरी पर रखा | वो ये मानते रहे की कच्छ में आये भूकंप की वजह से संतोष का परिवार ख़त्म हो गया और संतोष की याददाश्त चली गई | भरत भाई ने संतोष को मनोचिकित्सक को दिखाया जिसकी वजह से उसने आधी अधूरी जानकारी अपने परिवार के बारे में भरत भाई को दी |
उस आधार पर भरत भाई ने गूगल सर्च कर मध्य प्रदेश में रह रहे संतोष के भाई को ढूंढ निकला | भरत भाई ने संतोष को उसके बिछुड़े परिवार से 22 साल बाद मिलवाने में तो मदद की ही | साथ ही उन्होंने नौकरी से बचाये हुए पैसे भी संतोष के परिवार को लौटाकर इस कलयुग में प्रेरणा दायक काम किया है | हमे भी भरत भाई जैसे लोगो का उत्साहवर्धन करना चाहिए ताकि लोग इंसानियत को शर्मसार करने के बजाए इंसानियत दिखने के लिए प्रेरित हो सके |
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