क्या जीवन को हम शह और मात का खेल बना रहें हैं ?

आज हर व्यक्ति अपनी जीत चाहता है मात यानि हार कोई नहीं चाहता यह सही है कि खेलों में अपनी जीत के लिए दूसरों को हराना आवश्यक होता है लेकिन उसके भी कुछ नीति नियम होतें हैं |

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आज हम जीवन में भी खेलों की तरह ही अपनी जीत के लिए दूसरों को हराना आवश्यक समझने लगें हैं जबकि जीवन में हमे अपनी जीत को जीतने के लिए दूसरों को हराना बिलकुल आवश्यक नहीं है जीवन को हम शह और मात का खेल बना रहें हैं | 

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आज लोग जीवन की प्लानिंग इस तरह से कर रहें हैं की अपनी शह के साथ हम दूसरों को किस प्रकार मात दे और यही वजह है की हम दूसरों को मात देने के लिए तनावपूर्ण जीवन जी रहें हैं दुखी जीवन जीने पर मजबूर हैं यदि हम दूसरों को मात देने की जगह हमारी जीत की प्लानिंग करें तो शायद हमे न तो तनाव लेने की आवश्यकता होगी न दुखी होने की |

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जीवन को हमने खेल का मैदान बना दिया है राजनीती का अखाडा बना दिया है | शतरंजी चालों की वजह से हम सुख शांति खो चुकें हैं | हर बात में हम अपने आप को जीताना चाहतें हैं और दूसरों को हराना चाहतें है | हर कोई जीतने की उम्मीद में मात खाता जा रहा है बिना सुख शांति के तनावग्रस्त होकर जीवन जीना ही हमारी सबसे बड़ी मात है |

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