आज के युग में किसी को भी गलतियों का एहसास करा पाना बहुत मुश्किल हो गया है | कारण बहुत से हैं | जीवन में कई बातें ऐसी होती हैं जो किसी नज़रिये से देखने पर गलत लगती है | वही बात अगर दूसरे नज़रिये से देखी जाए तो सही लगने लगती है | देश काल परिस्थितियों के हिसाब से यदि हम अपना नजरिया बदलने की कोशिश करें तो रोज़मर्रा की कई पारिवारिक समस्याओं के हल बड़ी आसानी से निकाले जा सकते है |
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आज हर परिवार में छोटी- छोटी बातों पर गंभीर समस्याएं पैदा हो रही है | जो परिवार खुशहाल ज़िंदगी जी रहे होते हैं |किसी भी समय बिखर कर टूट जाते हैं कार्य स्थल हो, समाज हो, पड़ोस हो या दोस्ती हो किसी बात को सही या गलत ठहरना असमंजस बन गया है | कारण है न तो गलती का एहसास कर पाना आसान है न गलती का एहसास करा पाना और जब गलतियों का एहसास करा पाना और कर पाना संभव नहीं होता तो वहां संभव होता है दूरियों का बढ़ना और दूरियों का बढ़ना भी एक हद तक तो अच्छा होता है परन्तु यह भी जब ज़रुरत से ज़्यादा बढ़ जाती है तो आवश्यकता पड़ने पर एक दूसरे के पास पहुंचना भी सम्भव नहीं होता और तब आप चाहते हुए भी किसी समस्या का हल नहीं निकाल सकते |
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जब दूरियां ज़रुरत से ज़्यादा बढ़ जाती है तो प्रेम, प्यार, भावनाएं , मान सम्मान, अच्छाइयां सब कुछ समाप्त हो जाते है |और शुरू हो जाती है बिना सोचे समझे एक दूसरे पर दोषारोपण , नफरत , गुस्सा , जिद का साम्राज्य शुरू हो जाता है और जहाँ नफरत गुस्सा जिद शुरू हो जाती है वहां की सुख शांति सम्पन्नता खुशहाली स्वतः ही समाप्त हो जाती है | फिर चाहे आप अपनी एड़ी से चोटी तक का जोर लगा लो जीवन जीना मुश्किल हो जाता है | यदि इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण आप देखना चाहे तो अपने परिवारों में देखें , अपने कार्य स्थल पर देखें ,अपने पड़ोस में देखें ,समाज में देखे छोटी- छोटी बातों में दूरियां बढ़ा लेना कितना घातक और खतरनाक होता है|
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इसलिए जब भी कोई आपको आपकी गलती का एहसास कराए | अपना नजरिया बदलकर सोचने की कोशिश अवश्य करें दूसरों को भी गलती का एहसास कराना चाहते हैं तो नजरिया बदलकर करें जिद ,नफरत, गुस्सा कभी सुख शांति खुशहाली और सम्पन्नता का प्रतीक नहीं हो सकता यह दुनिया की सबसे बड़ी सच्चाई है सिर्फ गलतियों के एहसास और प्यार मोहब्बत से ही किसी का ह्रदय परिवर्तित किया जा सकता है ज़िद नफरत और गुस्से से नहीं
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