कहीं सुख सुविधाओं के आदि तो नहीं हो चुके हैं हम ?
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आज हर व्यक्ति तनावग्रस्त जीवन जी रहा है और इस तनाव का मुख्य कारण है भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति की लालसा आज हम थोड़ी सी भी असुविधा को सहन नहीं कर पातें हैं | सुख सुविधाओं के हम इतने आदि हो चुके हैं की यदि हमे सुख सुविधा नहीं मिले तो हम बगावत पर उतर आतें हैं | चाहे वो हमारा घर ही क्यों न हो | आज इस वैज्ञानिक युग ने हमारे जीवन को इतना आसान बना दिया है जिसकी हम आज से 25 - 30 साल पहले कल्पना भी नहीं कर सकते थे | पहले जहाँ मनोरंजन के नाम पर सिर्फ दूरदर्शन ही एकमात्र साधन हुआ करता था | आज न जाने कितने चैनल उपलब्ध हैं | इंटरनेट के माध्यम से हम सोशल मिडिया के साथ- साथ न जाने कितने मनोरंजन के साधन यूज़ कर सकते हैं | पुराने समय में जहाँ कमाने वाला एक व्यक्ति होता था खाने वाले पांच व्यक्ति होते थे तो भी पूरा परिवार राजी ख़ुशी से रहता था | आज घर के लगभग सभी सदस्य कमाते हों तो भी खर्चे पूरे नहीं हो पाते और कमाई बावजूद सभी तनावग्रस्त रहे है | आज हर घर में टीवी , फ्रिज , कूलर , 2 व्हीलर होते हैं जबकि पहले ये सुविधाएं सिर्फ अमीरों के नसीब में हुआ करती थी | यदि किसी मिडिल क्लास व्यक्ति के पास ये सुविधाएं होती थी तो समाज में रूतबा बढ़ जाता था |
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क्या मनोरंजन खान पान रहन सहन यातायात के साधनों क्रय शक्ति शिक्षा में प्रगति नहीं हुई है ?
खान पान की यदि बात की जाए तो पहले लोग पारम्परिक खान पान तक ही सीमित थे | आज देश के हर राज्यों के व्यंजनों के बारे में उत्त्तर से दक्षिण तक तथा पूरब से पश्चिम तक हर तरह के व्यंजनों के बारे में कई जांकारियाँ लोगों के पास उपलब्ध है | और उनका लुफ्त उठाया जा रहा है | यहाँ तक की आज हम विदेशी व्यंजनों का भी आनंद ले लेते हैं | आज यदि हम बाज़ारों की बात करे तो लोगों के लिए किसी भी चीज़ की उपलब्धता का अभाव नहीं है | आज ऑनलाइन शॉपिंग के ज़माने में कही भी कसी भी चीज़ को मंगाया जा सकता है | शिक्षा का प्रतिशत भी बढ़ा है महिला शिक्षा की बात करें या महिलाओं की स्थिति की तो उसमे भी सुधार हुआ है | महिलाओं के लिए आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर हैं | आय की यदि बात की जाये तो हर व्यक्ति की आय में भी इजाफा हुआ है | यातायात सुविधाएं पहले से दुरुस्त हुई है | इंटरनेट क्रांति ने हमारी लाइफ ही बदल दी है | क्या मनोरंजन खान पान रहन सहन यातायात के साधनों क्रय शक्ति शिक्षा में प्रगति नहीं हुई है ? फिर भी कोई भी किसी भी क्षेत्र में संतुष्ट नहीं है |
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सुख सुविधाओं के दुरूपयोग की वजह से हम तनाव तो नहीं बढ़ा रहे है ?
यदि हम सकारात्मक सोच से और सच्चे मन से आंकलन करे तो पाएंगे की सुख सुवधाओं मे हर वर्ष वृध्दि हुई है लेकिन इन सुख सुविधाओं के दुरूपयोग की वजह से हम तनाव बढ़ा रहे है | फिजूल खर्चे बड़ रहे है | बीमारियां बढ़ रही है | प्रदुषण बढ़ रहा है | महंगाई बढ़ रही है | और यही महंगाई नफरत दुश्मनी और गुस्सा बढ़ा रहे हैं | यही गुस्सा कभी न कभी हमारा दूसरों पर फूटता है दूसरों का हम पर जिसके लिए कभी हम परिवार के सदस्य को जिम्मेदार ठहराते हैं, कभी पडोसी को, कभी समज को ,कभी राजनीती को, तो कभी प्रशासन को लेकिन हम कहाँ गलत हैं यह कोई मानने को तैयार नहीं होता है | अधिकतर समस्याओं के समाधान हम खुद निकाल सकते | इसलिए दूसरो पर दोषारोपण करने से पहले खुद आंकलन करना सीखें की कही हम सुविधाओं का दुरूपयोग तो नहीं कर रहे | जिस दिन हमने यह करना सिख लिया उस दिन बहुत सी समस्याओं के समाधान स्वतः ही निकल जायेगे हम भी तनाव मुक्त रहेंगे और दूसरे भी |
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