बुद्दिमान सिर्फ हम ही नहीं दूसरा भी हो सकता है कछुए और खरगोश की नई प्रेरणादायक कहानी
ये है कछुए और खरगोश की नई प्रेरणादायक कहानी
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कछुवे को भी जीत का नशा था उसने बिना सोचे समझे अहंकार में चेलेंज स्वीकार कर लिया | निश्चित रूप से इस बार खरगोश तेज़ दौड़ा और अपनी गलती दोबारा नहीं दोहराई | और रेस जीत गया कछुए को इस बात का पछतावा नहीं हुआ लेकिन उसने आत्म मंथन किया | यही सोचा की इस तरह से तो में कभी किसी से रेस जीत ही नहीं पाउँगा |
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यह कहानी तो आपने सुन ही रखी है की कछुए ने धीरे ही सही पर लगातार चल कर रेस जीत ली | लेकिन खरगोश को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने अपनी गलती स्वीकारते हुए दोबारा दौड़ लगाने के लिए कछुए को राज़ी कर लिया |
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कछुवे को भी जीत का नशा था उसने बिना सोचे समझे अहंकार में चेलेंज स्वीकार कर लिया | निश्चित रूप से इस बार खरगोश तेज़ दौड़ा और अपनी गलती दोबारा नहीं दोहराई | और रेस जीत गया कछुए को इस बात का पछतावा नहीं हुआ लेकिन उसने आत्म मंथन किया | यही सोचा की इस तरह से तो में कभी किसी से रेस जीत ही नहीं पाउँगा |
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इस बार कछुए ने खरगोश को हराने के लिए एक उपाय सोचा | कछुए ने खरगोश को एक शर्त के साथ दोबारा चैलेंज दिया | उसने खरगोश से कहा की इस बार दौड़ मेरे बताये रस्ते पर होगी | खरगोश ने बिना विचार करे अपने जीत के घमंड में हाँ कर दी |
कछुए ने जो रास्ता दौड़ के लिए चुना उसके बीच में नदी पड़ती थी | खरगोश नदी पार नहीं कर सका और कछुआ नदी पार करके रेस जीत गया इस बार इस कहानी का मोरल बदल गया | बुद्दिमान सिर्फ हम ही नहीं दूसरा भी हो सकता है | इस कहानी से हमे सबक लेना चाहिए आप भले ही कितने भी समझदार हो परन्तु हमे यह भी स्वीकारना चाहिए की दूसरे भी समझदार हो सकते है | आप कितने ही सही हो परन्तु दूसरे भी सही हो सकते है | हमे कभी भी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए |



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