जीवन की किताब का पेज भले ही फाड़ दे पूरी किताब मत फाड़िये | Life changing idea | jeevan mantra|
jeevan mantra हर व्यक्ति का जीवन एक खुली किताब की तरह होता है | जो कुछ भी अच्छा- बुरा, सही- गलत हम जीवन में करते हैं वह इस किताब में छपता जाता है | एक किताब, एक - एक सार्थक शब्द ,वाक्य तथा पन्नो से बनती है | कोई इसे पढ़ पाता है कोई नहीं | क्या आप ने अपने जीवन की किताब को कभी पढ़ा है ? यदि हाँ तो देखिये आपने कितनी बार जीवन रूपी किताब का एक शब्द गलत होने पर पूरा पेज ही फाड़ डाला ? कितनी बार एक पेज गलत होने पर पूरी की पूरी किताब ही फाड़ डाली ?
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यानि हमारे जीवन की किसी एक गलती के लिए jeevan mantra सारा जीवन दॉँव पर नहीं लगाया जाता | परन्तु हम जीवन भर यही गलती करते हैं जीवन की इस किताब का एक शब्द गलत होने पर हम पूरा पेज ही फाड़ डालते हैं | एक पेज गलत होने पर पूरी किताब ही फाड़ डालते हैं | यानि जीवन ही दॉँव पर लगा देते है | चाहे वो हमसे गलत हुआ हो या दूसरों से| दूसरो की भी हम पूरी की पूरी किताब ही फाड़ डालते है |
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आज हमारे रिश्तों में दरारे पड़ने का का मुख्य कारण यही है कि हम नई इबारत नहीं लिखना चाहते | रिश्तों में मिठास बनाये रखने के लिए रिश्तों को निभाने के लिए पुराने अनुभवों से सीखना पड़ता है जो हम जीवन रूपी किताब को पढ़कर उसके गलत छपे शब्दों को, गलत वाक्यों को, गलत पन्नो को, अपरिभाषित तथा निरर्थक बातो को हटाकर कर सकते है | उसके लिए उन शब्दों ,उन वाक्यों ,उन पन्नो को फाड़ने की जरूरत नहीं होती ;है जो परिभाषित है, जो सार्थक है | क्योकि jeevan mantraजीवन का एक पेज लिखने में बहुत पसीना बहाना पड़ता है, परिश्रम करना पड़ता है, संघर्ष करना पड़ता है| इस संघर्ष और परिश्रम का कोई मूल्य नहीं होता परन्तु इस किताब के अनुभव बड़े कीमती होते है | ना जाने कब कौनसा सार्थक शब्द सार्थक पन्ना काम आ जाये | इसलिए अपनी गलती को स्वीकार कर उसमे सुधार करें आवश्यकता पड़ने पर पेज फाडे किताब नहीं |
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