तीन टांग की दौड़ के खेल से सीखा जा सकता है जीवन के रिश्तो में तालमेल बनाना
तीन टांग की दौड़ का खेल
हमारी ज़िंदगी तीन टांग की दौड़ के खेल की तरह है | बचपन में यदि आपने तीन टांग की दौड़ दौड़ी हो तो आपको याद होगा की इस में दो पार्टनर अपनी एक एक टांग एक दूसरे के साथ बांधकर फिर दौड़ लगते हैं | जो इतना आसान नहीं होता है | दोनों की एक एक टांग खुली होती है और एक एक टांग एक दूसरे के साथ बंधी होती है | जो बंधी हुई टांग होती है उसका बैलेंस बनाना बड़ा मुश्किल होता है क्योंकि खुली हुई टांग तो आपकी इच्छा पर चलती है लेकिन बंधी हुई टांग सिर्फ आपकी इच्छा पर नहीं बल्कि दोनों की इच्छा पर ही चलती है | यदि आप दोनों पार्टनर बराबर तालमेल बिठाकर बंधी हुई टांगो को चलाने का प्रयत्न करेंगे तो आप बड़ी आसानी से तीन टांग की दौड़ दौड़ पाएंगे | जो लोग इस बात का ध्यान नहीं रखेंगे वे थोड़ी ही दूर चलने के बाद उलझ कर गिर जाएंगे |
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हमारा जीवन भी तीन टांग की दौड़ के खेल की तरह है | यह किसी न किसी रिश्ते से जुडा हुआ है | जहाँ तीसरी टांग सही काम कर रही है संभल कर चल रही है तालमेल बैठाकर चल रही है वहां रिश्ते दौड़ते नज़र आते हैं जहाँ तालमेल बिगड़ जाता है वहां रिश्ते उलझ कर गिरते ही नहीं है बल्कि टूट जाते हैं | इसलिए ज़िंदगी को सही तरीके से चलाने के लिए तीन टांग की दौड़ का खेल खेलना और सीखना बहुत आवश्यक है | यह खेल खेलकर जिस व्यक्ति ने अपनी टांगो का तालमेल बनाकर इस दौड़ को जीत लिया वह ज़िंदगी की दौड़ को भी बड़ी आसानी से जीत सकता है |
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तीन टांग की दौड़ जहां खेल की दृष्टि से महत्वपूर्ण है वहीं जीवन में किसी भी रिश्ते में तालमेल बनाना सिखने के लिए इस दौड़ को दौड़ कर देखना बहुत ही जरूरी है | | इस दौड़ को यदि आपने आज तक नहीं दौड़ा है तो एक बार अवश्य दौड़ कर देखे | मनोरंजन के साथ- साथ इस दौड़ को दौड़ने के बाद आप यह जरूर महसूस करेंगे की वास्तव में लोग क्यों रिश्तो में तालमेल नहीं बना पाते है ? यदि तीन टांग की दौड़ दौड़ने के बाद आपको आनंद मिला हो और रिश्तो से इस दौड़ का संबंध महसूस हुआ हो तो हमे कमेंट कर अपने विचार अवश्य बताये | हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा इसमें कोई कमी लगी हो तो अपने सुझाव अवश्य दे अच्छा लगा हो तो like share भी करें


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