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Raksha bandhan tips in corona देश काल परिस्थिति के अनुसार परिवर्तन ही जीवन में बदलाव का एक प्रयास है

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Raksha bandhan tips in corona देश काल परिस्थिति के अनुसार परिवर्तन ही जीवन में बदलाव का एक प्रयास है   वैसे तो त्यौहार हमारी परम्पराओं और संस्कृति का प्रतीक होते है परन्तु हर त्यौहार मनाने के पीछे कोई न कोई लॉजिक होता है, तर्क होता है| राखी यानि रक्षा बंधन का त्यौहार मनाने के पीछे भी लॉजिक छिपा है | राखी यानि रक्षा सूत्र  इस बात  का प्रमाण है कि बहन के द्वारा भाई की कलाई पर बांधा गया धागा इस कामना के साथ बांधा  जाता है कि यह धागा भाई की हर मुसीबत में रक्षा करेगा | वहीं भाई भी बहन द्वारा बांधे गए धागे का सम्मान रखते हुए बहन की हर मुसीबत में रक्षा करने, हर मुसीबत में उसके साथ खड़ा रहने का वचन देता है |  परन्तु आज के युग में रक्षा बंधन का यह त्यौहार परम्परा और वचन का मोहताज नहीं है बल्कि आज भले ही यह करोना काल की वजह से उत्साह वर्धक न हो लेकिन कोरोना काल के पहले से ही यह त्यौहार हर त्यौहार की तरह अपने मूल उद्देश्य को शायद खो चुका है | https://images.app.goo.gl/KwgPZBMEiDM3DS3y8 raksha-bandhan-tips-corona  जिस...

हम यदि किताब के पेज है तो माँ पूरी किताब है हम शब्द है तो माँ भाषा है | "HAPPY MOTHER'S DAY"| प्रेरणादायक सुविचार

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  "Mother's Day is celebrated every year on the second Sunday of May"  " HAPPY MOTHER'S DAY" 10th May 2020, Sunday                                                        प्रेरणादायक सुविचार   परिवार में एक  मां ही होती है जो परिवार को बांध कर रख सकती है |  मां अपने परिवार के लिए जितनी क़ुरबानी देती है शायद ही कोई और देता है  | माँ अपने बच्चो को पालने के लिए क्या क्या नहीं करती  ? इस लिहाज से यदि देखा जाये तो  हम यदि किताब के पेज है तो माँ पूरी किताब है |  हम शब्द है तो माँ भाषा है |   माँ तो माँ है माँ की इससे बड़ी क्या परिभाषा है ? | https://images.app.goo.gl/kFZc59ABMNRyo4KR9 वास्तव में  दुनिया में भगवान से भी बड़ा कद  किसी  का  है तो  वह है  मां | क्योंकि  भगवान आदमी तो बना  सकता है परन्तु  उसे संस्कार  देक...

Life changing idea | जीवन को तलाशे नहीं बल्कि तराशे | Life thought in hindi

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Copyright Holder: Nainika    Life changing idea  हर व्यक्ति कुछ-न-कुछ तलाश रहा है| कोई सुख की तलाश में है, कोई पैसे की, किसी को ईमानदार लोगों की तलाश है, किसी को अच्छे दोस्तों की, कोई भगवान की तलाश में है, कोई भक्तों की, किसी को छाया की तलाश है, किसी को धूप की |   मालिक को तलाश है अच्छे कर्मचारियों की, कर्मचारियों को तलाश होती है अच्छे मालिक की, लड़के को अच्छी लड़की की तलाश है, लड़की को अच्छे लड़के की, मां बाप को बच्चों के भविष्य की तलाश है, जनता को अच्छे नेता की तलाश है, नेताओं को अच्छे कार्यकर्ता की |  लिस्ट इतनी लंबी है कि सारी उम्र हम तलाशने  में ही निकाल दें तो  भी  हमारी तलाश जारी ही रहती है | कभी पूरी ही नहीं हो पाती है | किसी को भी  संतुष्टि मिल ही नहीं पाती है ?  लेकिन यदि हम थोड़ा नजरिया बदल ले   तलाशने  की जगह हम यदि  तराशने  का कार्य करें तो कुछ हद तक हम इस तलाश की समस्या का हल ढूंढ सकते हैं | यह एक life changing  idea है एक दूसरे को तराश कर हर ...

घर परिवार दफ्तर पड़ोस | झगड़े तूतू मैं मैं | easy tips for family disputes in hindi

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 सही काम को गलत तरीके से मत करो |  गलत लगने वाले काम के तरीके सही कर लो  अक्सर आप देखते होंगे घर- परिवार, पास- पड़ोस या दफ्तर में छोटी छोटी बातो पर बड़े बड़े विवाद हो जाते है | बातें  कुछ ख़ास गलत नहीं होती है  सिर्फ काम करने के तरीकों  में फर्क होता है | यदि  तरीकों  को सही कर लिया जाए तो  गलत भी सही लगने लगेगा | सास बहू  के झगड़े , जिगरी दोस्तो  में दुश्मनी , पड़ोसी- पड़ोसी में    विवाद  , पति  पत्नी के बीच  तू -तू  मैं - मैं   अक्सर सही या गलत बातों  की वजह से नहीं बल्कि बात को सही या गलत तरीके  से पेश करने के परिणाम स्वरूप होते है | यदि आप भी घर परिवार दफ्तर या पड़ोस में विवाद,  तू -तू  मैं - मैं  को निपटाने के सरल उपाय  खोज रहे है तो यह आर्टिकल जरूर पढ़े |  दूसरों   से अपेक्षा करने के बजाय खुद अपने तरीके बदले |  विवादों के उपाय बहुत सरल होते है फर्क सिर्फ अहंकार का होता है अहम और वहम  का होता है |  कुछ लोग अक्सर अपनी ही धुन में रहते ह...

मैं दुःख हूँ भाई मुझे भी अपने साथ खेलने दो

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मैं दुःख हूँ भाई मुझे भी अपने साथ खेलने दो | 

सुविचार, नशे की लत को दूर भगाओ दुनिया में परचम लहराओ

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सुविचार, नशे की लत को दूर भगाओ दुनिया में परचम लहराओ

जिंदगी में तो हर पल परीक्षा देनी पड़ती है ना उस परीक्षा की तिथि निर्धारित होती है, ना सिलेबस

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                            परीक्षा परीक्षा ,इम्तिहान  इंटरव्यू  देने के लिए हमें तैयारी करनी पड़ती है|  परीक्षा इंटरव्यू कोई भी हो उसकी तिथि निर्धारित होती है । और तिथि निर्धारित होने के बावजूद भी  हम गलतियां कर बैठते हैं कुछ लोग अच्छे अंक ले आते हैं, कुछ नहीं ला पाते हैं, कोई सफल होते हैं ,कोई असफल। परिणाम आने पर कोई पछताता है, कोई अपनी गलतियों को सुधारता है, कोई रोता है ,कोई हंसता है। यह स्थिति तब होती है जब हमें उसकी तिथि पहले से पता होती है, सिलेबस पता  होता है, समय अवधि पता होती है। फिर भी हम गलतियां कर बैठते हैं |                       जिंदगी में तो हर पल परीक्षा देनी पड़ती है ना उस परीक्षा की तिथि निर्धारित होती है, ना सिलेबस ना समय अवधि। यह परीक्षा ता उम्र चलती है |  जन्म से लेकर मृत्यु तक किस समय किस विषय की परीक्षा हो जाए यह भी पता नहीं परीक्षा केंद्र कहां होगा यह पता नहीं|  परीक्षा की कोई उम्र भी तय नहीं ह...

जीवन के बुनियादी सबक

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अक्सर लोग अपना जीवन गुस्सा, क्रोध ,लड़ाई- झगड़े , असंतुष्टि ,दोषारोपण में गुजार देते है और अपने आप को सही, सच्चा, ईमानदार तथा दूसरों  को गलत, झूठा, बेईमान साबित करते रहते है |  इसी उधेड़ बुन  में हंसना ,मुस्कुराना, मानवता, नैतिकता भूल कर सम्पूर्ण जीवन  दुःखों , कठिनाइयों, समस्याओं,  परेशानियों  के हवाले कर  निराशा ,हताशा को अपने मन में बैठा कर कुंठित होकर अच्छे भले जीवन की वाट लगा बैठते है|  हम अपने जीवन का आकलन तो कर नहीं पाते है  दुनिया के जीवन का आकलन करने में अपने   जीवन  को तोड़ मरोड़ कर निचोड़  देते है फिर सबसे खास बात  निचोड़ने के बाद हम उसकी  सलवटे भी नहीं देख पाते है |   ऐसे लोग दूसरो  को भी जीवन नहीं जीने देते है |  इसलिए यदि जीवन को सम्पूर्ण जीना चाहते है तो  अपने ऊपर पड़ी हुई सलवटे भी दूर करने की कोशिश करे  क्योँकि  हम अपना चेहरा खुद कभी नहीं देख सकते  वो हमे कोई दुसरा ही बता सकता है या फिर आईना |  अतः  जीवन के ये दस बुनियादी सबक याद रखें  इन ...

क्या आधुनिक समय में पैसा मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है ?

क्या आधुनिक समय में पैसा मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है ?   इंसानियत और मानवता के लिए भी खतरा है  पैसे के पीछे दौड़ना आधुनिक समय में पैसा मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है |  पैसा होना और   ना  होना दोनों  ही  दुश्मनी की वजह है | अधिकतर  अमीर  इंसान गरीब को अपना दुश्मन समझते  है |  वहीं  कई बार  गरीब इन्सान  भी बेवजह ही अमीरों  को अपना दुश्मन समझने  लगता है | चाहे हकीकत कुछ  भी हो  लेकिन यह कटु सत्य है  | पैसा कमाने के चक्कर में इंसान अपने रिश्ते नातों  को भूल जाता है  | और उनसे दुश्मनी मोल ले लेता है |   अपने थोड़े से   लालच के लिए वह इंसानियत तक को ताक  पर रख देता है  |  दुनिया भर  का तनाव और दुश्मनी लेकर भी इंसान पैसा कमाने की दौड़ में  सबसे आगे खड़ा होना  चाहता है |  ताज्जुब जब  होता  है  जब एक सुशिक्षित, प्रतिष्ठित , ईमानदार इंसान भी पैसा कमाने के  लिए का...

और तभी सतयुग आ जाएगा

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हर व्यक्ति अपने आप को स्पष्टवादी कहता है| कभी भी कही भी चाहे मुद्दा सामाजिक हो, राजनैतिक या पारिवारिक| जब भी किसी विषय पर बहस होती है तो आमतौर पर हर व्यक्ति यही कहता है कि मै तो स्पष्ट बोलता हूँ | मेरी आदत लाग लपेट करने की नही है। क्या सिर्फ यह कहना कि मै तो स्पष्ट बोलता हूँ स्पष्टवादी होने का प्रमाण है | यदि ऐसा हो तो दुनिया की सबसे लम्बी लिस्ट स्पष्टवादियों की होगी। क्योंकि हर व्यक्ति साबित कर देगा की वह स्पष्टवादी है| फिर तो दुनिया में किसी बात की समस्या ही नहीं रहेगी। https://goo.gl/images/mhCFX3 क्योंकि जहाँ स्पष्टता विद्यमान होती है वहाँ न झूठ चल सकता है न बुराई, न धोखा चल सकता है न विश्वासघात, न जाति चल सकती है, न धर्म| बेईमानी के लिए स्थान ही नही बचेगा। दुख बेचारा कहाँ खड़ा हो सकेगा ? निराशा को तो कोई पूछेगा भी नहीं | क्रोध किस पर उतारोगे ?लड़ाई- झगड़े सब शान्ति के साथ विश्राम करेंगे। नियम कानूनों की बड़ी - बड़ी किताबों का क्या होगा ? सब समस्याएं खत्म| भगवान को भी अपना मोबाईल स्विच आॅफ़ करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आरक्षण की आग से लेकर रिश्वत खोरी तक सब जड़ से नष्ट। सुन...

जीवन से जुडी इन 10 बातों को कभी इंसानियत नहीं कहा जा सकता

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आज के इस माहौल में हर व्यक्ति अपने आप को असहज महसूस कर रहा है |  सामाजिक परिवेश में दैनिक माहौल को सुधरने की आवशयकता हर व्यक्ति महसूस कर रहा है  |  इसके लिए जो उपाय करने चाहिए उसकी सलाह भी हर व्यक्ति दूसरो को दे कर इति  श्री भी कर रहा है |  परन्तु खुद पर जब बात आती है तो कोई उस पर अमल नहीं करना चाहता |  बिगड़े हुए माहौल को सुधरने की जिम्मेदारी सिर्फ मुखिया जी की ही नहीं होती |  उसमे सभी को अपना अपना योगदान देना होता है |  और माहौल को सुधारने में   सबसे बड़ा योगदान होता है इंसानियत का जिसे हमे  मन से और श्रध्दा से करना चाहिए |कुछ बाते  ऐसी होती है जो इंसानियत की श्रेणी में नहीं आती और इन्ही की वजह से बड़े- बड़े  विवाद हो जाते है  | हम आपको बताने जा रहे है वो दस बाते  जिन से अक्सर विवाद खड़े होते है | https://images.app.goo.gl/STJsL9tWD4krPp1t6   जीवन से जुडी    इन  10  बातों  को कभी इंसानियत नहीं कहा  जा सकता |  1 उधार  के पैसे मांगने पर विवाद करना ...

जीवन जीने के लिए हमे हथियार और औजार का अर्थ समझना जरूरी है

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क्या है  हथियार और औजार का फर्क जीवन जीने के लिए हमे हथियार और औजार का अर्थ समझना जरूरी है | हथियार अशांति का प्रतीक है जबकि औजार शांति का  |  हथियारों से कभी भी किसी का भला नहीं हो सकता जबकि  औजार किसी भी कार्य को आसान बनाने में मददगार होते हैं |  जीवन जीने के लिए हमे हथियारों का नहीं औजारों का प्रयोग करना   चाहिए ताकि हमारा जीवन आसान बन सके | औजारों के प्रयोग से आविष्कार का जन्म होता है | https://images.app.goo.gl/NsMxdRLRPvJencVCA  ये हैं हमारे जीवन जीने के हथियार   क्रोध , गुस्सा ,  अहंकार ,  दुःख हिंसा , नकारात्मकता , द्वेषता समय का कुप्रबंधन हमारे जीवन के प्रमुख हथियार हैं  | जो व्यक्ति इनका प्रयोग करके जीवन जीना चाहते हैं वो  न खुद सुखी रह सकते  हैं न दूसरों  को रहने दे सकते हैं |  जीवन जीने के लिए  हमे हथियारों का नहीं बल्कि औजारों  का प्रयोग करना चहिये | https://images.app.goo.gl/MMbvSWJ2hYqHGt6h7     ये हैं  हमारे जीवन के म...

वर्तमान जीवन का आनंद

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माना की आधुनिक युग भूत , भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर   वर्तमान में जीवन जीने का युग है |   वर्तमान में जीवन का आनंद लेना बहुत जरूरी है |  परन्तु एक राजस्थानी कहावत है हांसी  में खाँसी यानि ज्यादा हँसने  से जब खाँसी  आ जाती है तो वो हमारे आँसू  निकल देती है  |  इसलिए मौज मस्ती करते वक्त हमे यह भी ध्यान रखना चाहिए की हमारी हंसी से हमारी ख़ुशी से दूसरो को कोई दुःख ना पहुंचे |  उन्हें कोई परेशानी न हो |  आज का युवा  अपनी मौज मस्ती को अपना सबसे बड़ा अधिकार समझने लगा है |  जिसके चलते उसे ये भी आभास नहीं हो रहा  की वह कहीं  कुछ  गलत तो नहीं कर  रहा है  |   उसकी मौज मस्ती से समाज में क्या गलत संदेश जा रहा है ? परिवार के लोगों  को क्या परेशानी महसूस करनी पड़  रही है  ? बुजुर्गो को क्या शर्मिंदगी झेलनी पड़  रही है ? उनकी हरकतों का छोटे बच्चो पर क्या प्रभाव पड  रहा है ?   मौज मस्ती के तौर  तरीको से  आर्थिक  स्थिति पर क...

बिना प्रेम के रिश्ते कभी भी अंकुरित नहीं हो सकते

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बिना प्रेम के रिश्ते कभी भी अंकुरित  नहीं हो सकते रिश्तों  का अंकुरित होना बहुत ही जरूरी है और उसके लिए जरूरी है  प्रेम   बिना  प्रेम  के रिश्ते कभी भी अंकुरित   नहीं हो सकते आज हम देख रहे है भाई भाई में  प्रेम  खत्म होता जा रहा है पति  पत्नि एक दूसरे से खुश नहीं है  प्रेम  नहीं होने खुश नहीं होने की वजह से एक दूसरे की सही बातो को मानना  भी मुश्किल हो जाता है जहाँ  प्रेम  होता है वहाँ  एक दूसरे की बात मानकर गलतियों को भी सुधारा जा सकता है |  प्रेम  नहीं होने से आपसी बातचीत बंद होना स्वाभाविक है संवादहीन रिश्ते बेजान हो जाते है न एक दूसरे की मन स्थिति पता चलती है संवेदनाओं  का पता नहीं चल  पाने की वजह से भावनात्मक लगाव खत्म हो जाता है एक दूसरे के दुःख दर्द  लगाव नहीं होने की वजह से महसूस नहीं किये जा सकते  | https://images.app.goo.gl/YSnTWEc4yyUNRT5w5  जब मुरझये फूल अच्छे नहीं लगते तो मुरझाये रिश्ते कहाँ  से अच्छे लगेंगे  दिल एक दूसरे के...

मन से खाने और खिलाने में परम आनंद का एहसास होता है

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                          खान पान  का लोगों  का अपना अपना नजरिया होता है                          किसी को  खाने से  ख़ुशी मिलती है किसी को   खिलाने से                                  लेकिन दोनों में मन का होना बहुत जरूरी है                         मन से खाने और खिलाने में परम आनंद का एहसास होता है   कहा जाता है जैसा खाओगे अन्न वैसा रहेगा मन ओर मन पर ही जीवन का आनंद  निर्भर है। क्योकि मन ही हमें दुखी करता है मन ही हमें सुखी मन ही हमें परेशानियों मे डालता है मन ही समस्याओं से निकालता है मन ही दुविधा में फँसाता है मन ही दुविधा से सुलझाता है। जिस व्यक्ति ने मन पर विजय पा ली उसने समस्याओं के रहते भी जीवन जी लिया अपने मन को प्रसन्न रखकर हम दूसरों के मन को खुशी द...

पर्यावरण का ब्याज चुकाने पर मजबूर होना पडेगा

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पर्यावरण का ब्याज चुकाने पर मजबूर हो जायेंगी  आने वाली  पीढ़ियां दोस्तों आज कोरोना वाइरस दुनिया के कोने कोने में फेल  चुका है  मुश्किल घड़ी से   दुनिया का हर  देश जूझ रहा है |     आज पर्यावरण के प्रति जो उदासीनता हम बरत रहे है जो लापरवाही हम कर रहे है  जो जिम्मेदारी हम नहीं समझ रहे है जिन स्वार्थों  की खातिर हम पर्यावरण को बिगाड़  रहे है जिन बातो को हम बहुत हल्के में ले रहे है उनसे आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण का ब्याज चुकाने पर  मजबूर होना पडेगा  और निश्चित रूप से आने वाले समय में करे कोई भरे कोई वाली कहावत चरितार्थ होने जा रही है | प्लास्टिक के कचरे तथा पर्यावरण के प्रति उदासीनता के चलते पर्यावरण प्रभावित हो चुका है | जिसका असर हमारे स्वस्थ पर देखा जा सकता है, जीवन पर देखा जा सकता है | नई- नई बीमारियां फैलना पर्यावरण प्रभावित होने का ही नतीजा है | https://images.app.goo.gl/HFdUfJrijmFo7jX5A कोई और तो करता नहीं फिर हम ही क्यों करे ? जो पैसा आज हम कमा रहे है उसका अधिकतर ह...

मदद न लेना स्वाभिमान नहीं बल्कि कभी कभी यह हमारा अभिमान होता है

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 पेड़ पौधो  की तरह होता है रिश्तो का महत्व  जिस तरह पेड़ पौधो के  हर भाग  का अपना  महत्व होता है, उपयोग होता है |  उसी प्रकार रिश्तो  का भी  महत्व होता   है |   बीज से  पौधा  बनता है, पौधा जब बड़ा होता है तो उसमे फल फूल लगते है जिनका इंतजार हम  जाने कितने समय से  करते रहते है |  जब फल फूल लगते है  तो हम उन की और आकर्षित होते है |   क्या कभी आपने सोचा है की फल फूलो की वृद्धि में किन- किन चीजों  का योगदान होता है   ? उत्तर मिलेगा बगीचे के माली का  |  माली का   योगदान पौधे की वृद्धि में हो सकता है, उसकी देखभाल में  योगदान को नकारा नहीं  जा सकता |  परन्तु फल फूलों  तथा वृक्ष की   वृद्धि में जड़, तना और पत्तियों का योगदान भी   होता है  | क्योकि जड़ का काम  जमीन से  पानी सोख कर तने तक पहुंचना होता है  और तना पानी को  पत्तियों  तक पहुंचने में मदद करता है |   ...

प्रेम, प्यार, भावनाएं, स्वभाव ये सब प्राकृतिक होतें हैं

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आज हम जीवन को पूर्ण रूप से कृत्रिम बना चुकें हैं जो चीज़ प्रकृति ने हमें उपहार में दी है उसे भी हम भोतिक रूप से कृत्रिम बना चुकें हैं | प्रेम, प्यार, भावनाएं, स्वभाव ये सब प्राकृतिक होतें हैं | लेकिन हम इन्हे भी कृत्रिम रूप से प्रदर्शित कर रहें हैं | नफरत, गुस्सा, क्रोध भी हम स्वाभाविक रूप से प्रदर्शित नहीं कर पा रहें हैं |  https://goo.gl/images/kuoogf यही वजह है की हर इंसान हमें गिरगिट की तरह रंग बदलता हुआ नज़र आ रहा है | सोचकर देखें क्यों कोई अपना सा लगने के बाद भी कुछ ही दिनों में पराया सा लगने लगता है ? क्यों जिसे हम बहुत ज़्यादा चाहने लगतें हैं कुछ ही दिनों में अनजान सा लगने लगता है ? क्यों हमें लोग अचानक ही बदलते से नज़र आने लगतें हैं ? क्यों हम किसी को पहचानने में भी बड़ी भूल करते नज़र आने लगतें हैं ? https://goo.gl/images/xLbR3t क्यों किसी व्यक्ति को जिससे हमें बहुत उम्मीद होती है जो हमारा परम हितेषी लगने लगता है उससे दूरी बनाने लगतें हैं ? ऐसी कई सारी बातें हैं जो इस बात को साबित करती है की क्यों इंसान अपनी स्वाभाविक पहचान छिपाना चाहता है क्यों अपने को प...