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अधिकतर समस्याएं पैसा होने और न होने की वजह से पैदा होती है

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 दुनिया में आज पैसा इस कदर हावी हो चुका है की किसी भी बात का सही और गलत होने का अंदाजा  लगाना मुश्किल   हो गया है |  पैसों की वजह से कब  कोई ईमानदार व्यक्ति  बेईमान साबित हो जाये पता नहीं  |  कब कोई  बेईमान अपने आप को    ईमानदार साबित  कर दे कहा नहीं जा सकता |  इसी असमंजस की वजह से हर कोई  पैसा बटोर लेना चाहता है |  हर कोई गलत फहमी में है की कब मुसीबत आ पड़े और हम उस मुसीबत  का हल  पैसों से निकाले  | लोंग  इल https://images.app.goo.gl/pMQi9YXPxVCKxr1g7  यही हमारी गलत धारणा बन गयी है हम हर मुसीबत के हल पैसे से निकालना चाहते हैं |  हमारे इसी स्वार्थ और लालच  की वजह से   नियमों कानूनों को ताक पर  रखकर भी पैसा कमाने  का जुगाड़ ढूंढते हैं |  किसी को भी  धोखे में   रखकर नुकसान पहुंचाकर भी पैसा कमाने के लिए तैयार हो जाते हैं |  पैसे के  लेन देन में हम मरने मारने पर उतारू  हो जाते हैं |  पैसा कमाने ...

गलतियों का एहसास करने और कराने से होता है ह्रदय परिवर्तन

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आज के युग में किसी को भी गलतियों का एहसास करा पाना बहुत मुश्किल हो गया है |  कारण बहुत से हैं | जीवन  में कई बातें ऐसी होती हैं जो किसी नज़रिये से देखने पर गलत लगती है |  वही बात अगर दूसरे नज़रिये से देखी जाए तो सही लगने लगती है |  देश काल परिस्थितियों के हिसाब से यदि हम  अपना नजरिया बदलने की कोशिश करें तो रोज़मर्रा की कई पारिवारिक समस्याओं के हल बड़ी आसानी से निकाले  जा सकते है  | https://images.app.goo.gl/gUF2ABP55civ6jSD8 आज हर परिवार में छोटी- छोटी बातों  पर   गंभीर समस्याएं पैदा हो रही   है |  जो परिवार खुशहाल ज़िंदगी जी रहे होते हैं  |किसी भी   समय बिखर कर टूट जाते हैं कार्य स्थल हो, समाज हो, पड़ोस हो या दोस्ती हो किसी बात को सही या गलत ठहरना असमंजस बन गया है |  कारण है न तो गलती का एहसास  कर पाना आसान है न गलती का एहसास करा पाना और जब गलतियों का एहसास करा पाना और  कर पाना संभव नहीं होता तो वहां संभव होता है दूरियों का बढ़ना और दूरियों का बढ़ना भी एक हद तक तो अच्छ...

क्या 'मै' शब्द ने हमारे जीवन की ज़मीन को दलदल बना दिया है ? life mantra life tips

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क्या 'मै' शब्द ने  हमारे जीवन की  ज़मीन को  दलदल बना दिया है ?  life mantra life tips   स्वार्थी होने की हम बहुत बड़ी सजा भुगत रहे हैं | आज स्वार्थ इस  कदर हावी हो चुका  है की जमीन पर पैर रखने तक की जगह नसीब नहीं हो  पा  रही है |  खड़ा होना  तो दूर की बात जीवन के  धरातल पर स्वार्थ का दलदल इतना बन चुका है  जहाँ  पैर रखो वहीँ धसंता चला जाएगा  | आज आवश्यकता है इस दलदल को समतल करने की |   इस  जमीन को सुधारने की ताकि हम पैर  तो ज़मीन पर रखकर खड़े हो सके |आज  दुनिया में जितनी भी समस्याएं बढ़ रही हैं स्वार्थी होने की वजह से बढ़ रही हैं  | स्वार्थी होने की पुष्टि सिर्फ एक अक्षर का शब्द कर रहा है जिसका नाम है 'मै' |  इस 'मै' शब्द ने हमारे जीवन की  ज़मीन को ऐसा दलदल बना कर रख दिया  है  जहाँ  खड़े होना किसी के भी बस की बात नहीं रही है  |  https://goo.gl/images/bEaWf9 life-mantra-life-tips       'मै'  सही हूँ,...

आधुनिक युग और भौतिक सुख सुविधाएं

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    नमस्कार  दोस्तों,  क्या आप भी मानते हैआज का   युग भौतिक सुख सुविधाओं का युग बन चुका है बिना भौतिक सुख सुविधाओं के इंसान  दर्द से कराह उठता है ? क्या आज परिवारों में रिश्ते नातो  में अधिकतर  विवादो  की जड़ भौतिक सुख सुविधाओं के यूज और मिसयूज  है ? क्या आज लोगो में पैसा कमाने को लेकर जो द्वन्द है उसकी मुख्य वजह भौतिक सुख सुविधाओं की लालसा  है ?  क्या  आवश्यकता पड़ने पर बिना सुख सुविधाओं के भी जीवन जीने की आदत नहीं डालनी चाहिए ?  यदि आप ऐसा महसूस करते है तो यह लेख अवश्य पड़े                    बड़े बड़े महलों में  भी इंसान  खुश तब ही रह सकता है जब वह मन से खुश होगा स्वाभाव से खुश होगा  वरना खुश रहने के लिए तो एक झोपडी ही काफी है जो लोग मन से खुश होते हैं  वो लोग ख़ुशी  से जीवन यापन कर सकते हैं लेकिन जो लोग मन से खुश नहीं रहते वो महलों में रहकर सुख सुविधाएं पाकर भी अपने आप को दुखी करते रहते हैं दूसरों को दुखी करते ...

क्या है अहंकार और स्वाभिमान

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आज हम अहंकार और स्वाभिमान में फर्क नहीं समझ पा  रहे हैं | किसी भी बात के लिए दुखी होकर जिद पकड़ना, मदद न लेना, बात को नहीं मानना स्वाभिमान नहीं हो सकता |  आज अधिकतर लोग इसे स्वाभिमान का नाम देकर अपने आप को अहंकारी साबित कर रहे हैं यदि आप वास्तव में स्वाभिमानी बनना चाहते हैं तो पहले स्वाभिमान और अहंकार का अर्थ  समझें |  स्वाभिमान वह होता है जब हम किसी की बता को भले ही माने नहीं किसी की मदद भले ही न लें लेकिन उस बात को न मानने  के लिए किसी  को दोषी न ठहराएं, किसी का अहित करे बिना मदद को  विनम्रता से अस्वीकार करे  ठुकराए नहीं |  https://goo.gl/images/3SQfPA   परिस्थितियों और गलतियों के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराएं दोष देना और न देना ही तय करता है की आप स्वाभिमानी हैं या अहंकारी |  यदि आप किसी भी बात को नहीं मानने  के लिए उसकी प्रतिक्रिया बिना लालच बिना  क्रोध बिना द्वेषता के विनम्रता से मन की ख़ुशी से देते  हैं तो यह आपका स्वाभिमान है |  यदि आप यही प्रतिक्रिया मन में जहर भरकर मन को दुखी करके दूसर...

हम बच्चो को मत बहकाओ

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धर्म और आतंक की इस लड़ाई में एक बच्चे की पीड़ा जो कविता के जरिये  होली और ईद के त्योहारों में भाई चारे की उम्मीद जगाती है   हम तो होली मना रहे हैं रंगों और गुलालों की मेरे पापा खेल रहे हैं होली लहू के रंगों की                        https://goo.gl/images/c861jE पूछ रहा है एक ये बेटा उन आतंकी जल्लादों से  धर्मों को ऊंचा ले जाकर तुम कैसे उठ पाओगे ? फिर धर्मों की सीढ़ी चढ़कर कहाँ आकाश बनाओगे ? पैर जमीन पर रखकर ही तो सीढ़ी चढ़कर जाओगे ? बिखरे लहू के कतरे कतरे सीढ़ी कहाँ लगाओगे ? . https://goo.gl/images/bDqb74 त्योहारों का देश है मेरा सब धर्मों को  संदेश है  मेरा असलम मियां दोस्त है मेरा भानू  पंडित प्रिय है उसका मेरी होली नहीं मनी  तो क्या असलम खुश हो जायेगा? उसकी ईद नहीं मनी  तो मैं  कैसे खुश हो पाऊँगा? . https://goo.gl/images/HR3hxo मेरी गुजियों की खुशबू जब उसके घर को जाती है उसकी अम्मी सेवइँ लेकर मेरे घर पर आती है मेर...

जीवन जीने के लिए ज़रूरी है ज़िन्दगी की वर्णमाला का अभ्यास

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अभ्यास यानी 'प्रैक्टिस'| अभ्यास आप जिस चीज का करोगे निश्चित रुप से धीरे -धीरे उसे सीख जाओगे निर्भर करता है आपके अभ्यास नियमित करने पर| जिस तरह किसी भी भाषा का ज्ञान करने के लिए उसकी ए. बी.सी. डी. या वर्णमाला का अभ्यास जरुरी है, गणित सीखने के लिए गिनती पहाड़ों का अभ्यास जरुरी है, उसी तरह जिंदगी को जीने के लिए जिंदगी की ए. बी.सी. डी उसकी वर्णमाला का अभ्यास जरुरी है| बचपन में हमे हिंदी के स्वर- व्यंजन, इंग्लिश की ए. बी.सी. डी गिनती पहाड़े याद थे लेकिन आज हमसे कोई पूछ बैठें तो अधिकतर लोग क्रम से नहीं बता पाएंगे, लेकिन जिन लोगों ने अभ्यास जारी रखा हुआ है चाहे वह अपने बच्चों को पढ़ाने के माध्यम से जारी रहा हो या जिज्ञासावश वो लोग तुरंत बता देंगे क्योंकि यह उनके अभ्यास की वजह से याद रहा | https://goo.gl/images/AZpneR ठीक उसी तरह जिंदगी को याद रखने के लिए जिंदगी की ए. बी.सी. डी वर्णमाला गिनती पहाड़ों का अभ्यास जरुरी है जो अक्सर लोग नहीं करते हैं और करते हैं तो नियमित नहीं करते हैं यही वजह है कि हम जैसे- जैसे बड़े होते जाते हैं जिंदगी को भूलते जाते हैं क्योंकि हम इसका अभ्...